“प्रेम” (प्रेम की गहराई)

*वैलेंटाइन डे लेखन प्रतियोगिता 2026*
*विषय – ” प्रेम “( प्रेम की गहराई )*

ये प्रेम कोई पल भर का अफ़साना नहीं,
ये उम्र भर साथ निभाने का बहाना नहीं,
ये वो बंधन है जो रूहों को जोड़ता है,
हर जन्म में एक-दूजे की ओर मोड़ता है।

प्रेम सिर्फ़ शब्द नहीं, एहसास पुराना है,
रूह से रूह तक जाने का तराना है,
ये चुपके से दिल में घर कर जाता है,
सूखी ज़िंदगी को सावन कर जाता है।

उसकी धड़कनों में जो नाम मेरा ठहरता है,
हर लम्हा जैसे सजदे में सँवरता है,
उसकी आँखों की गहराई में जो उजास है,
वहीं मेरी सुबह है, वही मेरी साँस है।

उसकी ख़ामोशियों में भी साज़ बजते हैं,
मेरे भीतर कई अनकहे राज़ जगते हैं,
वो कुछ कहे न कहे, असर होता है,
हर इशारा दिल तक उतर जाता है।

कभी उसकी चुप्पी सवाल बन जाती है,
कभी वही दिल की ढाल बन जाती है,
इश्क़ उसका सरल और कठिन भी है,
कभी मरहम-सा, कभी नर्म सी चुभन भी है।

ना मंज़िल की चाह, ना दुनिया का गुमान है,
बस उसका होना ही मेरा अरमान है।
ये प्रेम कहानी नहीं, कोई फ़साना नहीं,
ये मेरा वजूद है *’सहर’* इससे बढ़कर कुछ नहीं।

*- स्वीटी कुमारी ‘सहर’*

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