प्रेम : वर्दी और यारा

प्रतियोगिता __ *वेलेंटाइन 2026*

विषय ___ *प्रेम : वर्दी और यारा

प्रेम के गलियारों में हर एक ख़्वाब अधुरा रह जाता है,
यूं ही नहीं एक कवि अधूरे इश्क़ की कहानी बताता है,
जैसे आशिकों को हो जाता है , प्रेम अपनी प्रेमिका से,
हां एथलीट यूं ही वर्दी के प्यार में अक्सर बह जाता है।

मेरा प्रेम कितना गहरा , शरीर का हर ज़ख्म बताता है,
लेकिन, किस्मत के आगे , पहलवान भी हार जाता है,
वर्दी से बिछड़ के हम भी, उतर आए थे आवारगी पर,
लेकिन कहते हैं , इश्क़ में खूबसूरत मोड़ आ जाता है।

एक सांवली सी लड़की आई थी , प्रेम प्रस्ताव लेकर,
हम भी उसके हो गए, अंतस का सूखा सहरांव लेकर,
उनके कदमों ने , हमारे एहसासात यूं जदीद कर दिए,
जैसे मुकम्मल हुआ दरख़्त , अपनी घनेरी छांव लेकर।

उसने हमें पूरा कर दिया मोहब्बत का अहसास देकर,
गर्मजोशी को समझदारी में बदल दिया, ख़्वाब देकर,
रुखसती के बाद भी हम खुद को खुशनसीब कहते हैं,
जब भी बैठते हैं, अकेले उनकी यादों को साथ लेकर।

आती है याद उनकी हमारे दिल ओ दिमाग में घूमकर,
ग़म दूर हो जाता है जब आते हैं , हसीं ख़्वाब झूमकर,
हमको कितना चुभते हैं वो लम्हे कि क्या ही कहें यारों,
जब रुखसत हुए उनसे , लबों से पेशानी को चूम कर।

खैर मेरे ख्वाबों में सबसे पहले उनका ही नाम आएगा,
मेरी तकदीर में नहीं थी वो हमेशा यही पैगाम आएगा,
उसको ही लिखता रहूंगा मैं, अपने अलफाजों में यारों,
पुकार के देखना कभी, राव बन के आसमान आएगा।

✍️ ___ *मयंक राव*

Updated: February 12, 2026 — 8:36 pm

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