प्रतियोगिता – वैलेंटाइन डे लेखन प्रतियोगिता 2026
विषय – “प्रेम”
एक छोटा सा ही हैं यह शब्द ” प्रेम ”
मगर बड़ी विशाल आभा प्रस्तुत करती है
ऐसा कोई प्राणी नहीं इस धरा पर
जो इस प्रेम की करती नहीं स्तुति है ।।
प्रेम एहसास है हमारे मन की मुस्कुराहट का
प्रेम ख़ामोशी है हवाओं की सरसराहट का
जीने लगते हैं हम खिलने लगती हैं कलियां
इशारा करने लगती है ज़िंदगी प्रेम की आहट का ।।
प्रेम तो सबको एक करता है गठरी की तरह
प्रेम तो अपनी नज़र से भरता है रोशनी की तरह
किनारा आवारा जो भी कहना हो कह लो इसे
शुष्क ना कहना यह बहा है आंसू में दरिया की तरह ।।
नफ़रतो को मिटा दे ऐसी ताकत होती प्रेम में
जो रोते को हंसा दे ऐसी इनायत होती प्रेम में
इसमें ठहराव है बहाव है निर्मल जल की तरह
जहां भी जाए वहीं भर देती शीतलता हमारे मन में ।।
जांचों ना प्रेम को अपनी सोच की परखनलियों में
दौड़ने दो बच्चे बनकर अपने मन की हर गलियों में
जलने दो बुझने दो चमकने दो जैसे भी है रहने दो
प्रेम के अस्तित्व को फूलने दो मन के फुलवरियों में ।।
सार यही है प्रेम का मन की स्पर्श से यह उभरता है
सूरज बनकर उगता है सूरज बनकर ही डूबता है
पिघलना आता है सबको इसमें और जलन भी
जीवन में प्रेम बाधक नहीं साधक से हमें जोड़ता है ।।
सुमन लता ✍️
अल्फाज़ -e-सुकून
