प्रेम

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विषय: प्रेम

प्रेम
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प्रेम कोई शब्द नहीं, जो होठों से उतर जाए,
यह वो मौन है, जो दिल में ख़ुद ठहर जाए।

प्रेम कोई ऐसा रंग नहीं, जो नज़र को भर दे,
यह वो उजास है, जो अँधेरे में रोशनी कर दे।

प्रेम को पाना नहीं, या किसी को बाँध लेना नहीं,
यह साथ चलने की चाह है, कुछ माँग लेना नहीं।

प्रेम आकर्षण नहीं, जो कभी मौसम सा बदल जाए,
यह आदत है, जो एक ही शख़्स को दिल में बसाए।

प्रेम कोई अधिकार नहीं, ना ही ये कोई दावा है,
यह भरोसे की मिसाल है, जो ख़ुद को निभाता है।

प्रेम कोई शोर नहीं, जो दुनिया को सुनाना पड़े,
यह तो वो सच है, जो ख़ामोशी में भी निभा जाये।

प्रेम दूरी में भी किसी के क़रीब होना सिखाता है,
और मौन रहकर भी ये बहुत कुछ कह जाता है।

प्रेम शर्तों का नहीं, बल्कि स्वीकृति का नाम है,
जो जैसा है, उसे वैसा ही अपनाने का काम है।

प्रेम छूटकर भी उस शख़्स से कभी दूर होता नहीं,
यह वो हाथ है, जो टूटकर भी कभी छोड़ता नहीं।

प्रेम समय से आगे चलने की हमें ताक़त देता है,
बदलते वक़्त में टिके रहने की आदत बनाता है।

प्रेम अंत नहीं, ना किसी कहानी का विराम है,
यह हर बिछड़न के बाद भी रहने वाला नाम है।

प्रेम वही है, जो सब कुछ खोकर भी साथ रह जाए,
और अंत तक एक इंसान को, इंसान ही बनाए रखे।

रचयिता: सुनील मौर्या

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