विषय : प्रेम ( शायरी )
तुझे सोचू में ख्याल अच्छा है,
देख के ही नींद उड़ गयी,ये बवाल कैसा है…
खोली है जो तूने जुल्फें अपनी,
चारों तरफ ये इत्र की, सुगंध क्या है…
अभी-अभी जो तुम हॅसे हो,
तुम्हारी हसीं से, ये रुहानी मौसम कैसा है…
भंवरे भी तुम्हे छूना चाहते है,
ये तुम्हारे गालों पे शहद-सा लगा क्या है…
हाय…! ये लब, खुले ना अब,
प्यार से भरे हुये, छलकता जाम क्या है,
देख के ही नशा हो गया मुझे,
मत पूछो मुझे, ये नशा कौनसा-सा है…
अब लगी लगाने जो तू बिंदी,
अब कहर फिर बाक़ी क्या है…
महकाने में, कौन जायेगा बता तू,
खुले आम तेरा आना,फिर शराब क्या है…
पतली कमर पे, पतली-सी साड़ी,
तुझे यूँ देखा, तो जन्नत मे बाक़ी बचा क्या…
अप्सराये भी तुझे देख के सजती है,
हम मरे ना तुझपे, तो बता करें भी क्या…
बहुत तराशा है तुझे खुदा ने,
तेरे जैसा एक भी ना मिला,बता करें क्या…
कहते हो पागल ना हो मेरे पीछे,
तो तू ही बता, अब इस कदर, हम मरे क्या…
~kabir pankaj
