विषा :-14 फ़रवरी – वो काली रात
14 फ़रवरी की क्या बात,
हर ज़ुबाँ पर है यह रात,
हर कोई देता इस पर दाद,
कैसे भूल जाऊँ वह अँधेरी रात…
इस दिन खोया किसी का बेटा,
सूनी हुई किसी की माँग,
रोती रही थीं माँ की आँखें,
गूँज उठा था सारा आकाश..…
खोए थे भाई, खोई थीं राखियाँ,
सूना था हर एक आँगन,
जिस देश ने खोए उस दिन
अपने चालीस वीर जवान…
कहने को यह मोहब्बत का दिन,
मोहब्बत तो उन्होंने भी निभा दी,
मिट्टी की ख़ातिर हँसते-हँसते
उन्होंने अपनी जान देश पर कुर्बान की…
अपनी जान कुर्बान कर
कोई अफसोस उन्हें हुआ नहीं
सीने पर गोलियाँ खाकर भी
मुख से किया कोई गिला नहीं…
आज अगर कोई प्यार मनाए,
तो याद उन्हें भी कर लेना,
जिनकी वजह से सुरक्षित है
हम सबका यह प्यारा वतन…
उनके त्याग की लौ जलाकर
सच्ची श्रद्धांजलि दे देना,
14 फ़रवरी की इस तारीख़ को
बस प्रेम नहीं — सम्मान से सीस झुका देना…
कर गए वह वफा उस देश के, मोहब्बत के नाम जान कुर्बान कर बैठे, बह गई खून की धारा , आँसूओं से भी हम धो ना सके……
©® Malwinder Kaur✍️
