निस्वार्थ प्रेम

मिला है जिस दिन से निस्वार्थ प्रेम तब से दिल में संभाला है,
दोस्त के रुप में अंजाना जीवन का सफ़र तय कर डाला है।

बिना सोचे समझे निस्वार्थ प्रेम तुमसे जीवन में किया है,
बदले में कुछ नहीं चेहरे पर तेरे मुस्कान देखना चाहा है।

तू दूर परदेश में रहता अकेला फ़िक्र मुझे तेरी बहुत होती है,
खाना खाया या नहीं खाया इस बात की च़िता सताती ही है।

दोस्त के रूप में अनमोल जीवन का फ़रिशता मैने पाया है,
निस्वार्थ प्रेम करके दिल को तेरे संग बैठ सुकून भी आया है।

तू छुपाये हजा़र बात फिर भी आँखें मेरी यह सब पढ़ लेती है,
तू ढूँढता है एकांत और मैं तेरी खुशी बन चेहरे पर चमकती है।

दिल में जग़ह देकर मैने जीवन में निस्वार्थ प्रेम कमाया है,
एक दोस्त के रुप में अपना बचपन फिर से जीना आया है।

बात-बात पर अकेला कभी महसूस मुझे तेरे बिन हुआ नहीं है,
बच्चा कहकर जब कभी तूने बुलाया जीने की वज़ह मिली है।

हर खुशी मुकम्मल हो वो ख्वाहिश मैने कभी चाही नहीं है,
मिल जाये सारी खुशी वो ही दिल में एक चाहत बस तेरी है।

तू प्यार नहीं तू सबसे प्यारा दिल में घर कर गया दोस्त है,
तू आरज़ू नहीं तू मेरे खुशियों की प्यार भरी एक चाभी है।

दिल में निस्वार्थ प्रेम हो तो रिश्ता कुछ भी हो प्यारा ही है,
मिल जाये इश्क़ वो बात आज भी तेरे बिन मुझमें नहीं है।

© गार्गी गुप्ता

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