गणतंत्र दिवस प्रतियोगिता
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टॉपिक: मेरी आवाज़, मेरे अधिकार
रचयिता: सुनील मौर्या
अल्फ़ाज़ ए सुकून के आदरणीय, निर्णायकगण, एडमिन के सदस्यों एवं मेरे सहभागियों— आप सभी को 77 वे गणतंत्र दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर, हार्दिक शुभकामनाएं 🌸
मेरा नाम सुनील मौर्या है, मैं मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ज़िला आज़मगढ़ के एक छोटे से गाँव, रामगढ़ से हूँ। विगत कुछ वर्षों से मैं अपने परिवार सहित नई दिल्ली में निवास कर रहा हूँ।
वर्तमान में मैं शिक्षा परामर्श के क्षेत्र में कार्यरत हूँ।
दोस्तों!! ये कौन नहीं जानता कि आज का भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है, लेकिन लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं बनता, लोकतंत्र बनता है जागरूक नागरिकों से।
आज, इसी गणतांत्रिक भावना और अपने विचारों के साथ मैं आप सभी के समक्ष अपने मन की बात करने आया हूँ, जिसका विषय है—
“मेरी आवाज़, मेरे अधिकार”
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साथियो,
मेरी आवाज़ सिर्फ़ बोलने की स्वतंत्रता नहीं है, मेरी आवाज़ वह शक्ति है, जो सवाल पूछती है, जो अन्याय के सामने खड़ी होती है, और जो बदलाव की नींव रखती है।
लेकिन हमें खुद से यह पूछना होगा —क्या हम अपनी आवाज़ का उपयोग कर रहे हैं या सिर्फ़ शिकायत करने में ही खर्च कर रहे हैं?
संविधान ने हमें अधिकार दिए, लेकिन अधिकारों के साथ कर्तव्यों की जिम्मेदारी भी दी।
जब हम मतदान नहीं करते, तो हम अपने ही अधिकारों को कमजोर करते हैं। जब हम गलत को देखकर भी चुप रहते हैं, तो हम लोकतंत्र को घायल करते हैं।
आज का युवा इस देश की सबसे बड़ी ताक़त है। लेकिन यह ताक़त तभी अर्थपूर्ण बनेगी जब युवा सिर्फ़ आलोचक नहीं, एक सक्रिय नागरिक बनेगा।
आज आवाज़ बहुत हैं, लेकिन सच की आवाज़ कम है।आज मंच तो बहुत हैं, लेकिन साहस लोगों में कम है।
लोकतंत्र में शोर नहीं चाहिए, संवाद चाहिए। यहाँ नारे नहीं चाहिए, निष्ठा चाहिए।
अगर मेरी आवाज़ बिकेगी, तो लोकतंत्र झुकेगा। अगर मेरी आवाज़ डरेगी, तो संविधान कमजोर होगा।
साथियो, गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि यह देश राजा से नहीं, नागरिक से चलता है।
आज हमें यह तय करना है कि—हम भीड़ बनकर रहेंगे या जिम्मेदार नागरिक बनेंगे?
हम सवाल पूछेंगे या खामोशी को आदत बना लेंगे?
आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम एक संकल्प लें — कि हम अपनी आवाज़ को न डर के नीचे दबने देंगे, न लालच में बिकने देंगे।
हम अपने अधिकारों को जानेंगे, और अपने कर्तव्यों को निभाएँगे। क्योंकि, जब एक नागरिक जागता है, तब लोकतंत्र मजबूत होता है और तभी राष्ट्र सुदृढ़ बनता है।
मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है, मेरे अधिकार ही मेरे देश की शान हैं।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳 जय संविधान 🇮🇳
