Category: Hindi kavita

प्यार या व्यपार

प्यार अब होने लगा व्यापार सा अब कहाँ रहता है कुछ भी प्यार सा।। इश्क़ गर हो जाए तो दिल में रखो दोस्तों में मत करो अख़बार सा।। कहने को दुनियाँ हमारी है सनम अब कहाँ कोई मगर गमख़्वार सा।। देख कर बच्चों की ख़ाली थालियाँ बाप कितना हो रहा लाचार सा । दुश्मनों की […]

❣️वेलेंटाइन डे लेखन काव्य प्रतियोगिता 2026💖

अवर्णनीय प्रेम का सौंदर्य मेरी प्रेयसी हो अति सुन्दर जिसका वर्णन ना कर पाऊं। कोशिश करके हौसले बुलंद लफ़्ज़ों से तुमको मैं गाऊं। नैन कटीले नाज़ुक पलकें चितवन नजरों की बतलाऊं। कोशिश करके हौसले बुलंद लफ़्ज़ों से तुमको मैं गाऊं।। नीरज अधरों को देखूं गर मैं तो नील कुसुम चुन लाऊं। रूप देखकर यारों उसका […]

प्रेम

प्रतियोगिता :- वैलेंटाइन डे लेखन प्रतियोगिता 2026* विषय:- प्रेम… एक अनंत एहसास प्रेम में दीवाने सभी हो जाते हैं, अपनी कही हुई बातों से अंजाने हो जाते हैं। भूलों को अक्सर छुपाते हैं, और वहीं प्रेम के अफ़साने हो जाते हैं… कुछ के लिए प्रेम महज़ एक खेल है, काम निकल जाए तो बस मेल […]

प्रेम

वेलेंटाइन डे लेखन प्रतियोगिता 2026 विषय :- “प्रेम” ढाई अक्षर का यह विषय अपने आप में मुक़म्मल एक क़िताब है, जिसपे लिखना बड़े ही गर्व और सौभाग्य की बात है। इस वेलेंटाइन प्रतियोगिता का विषय प्रेम जिसपे लिखे मैंने अल्फ़ाज़ हैं, तो प्रस्तुत है मेरी आज की कविता जिसे दी मैंने अपनी आवाज़ है। प्रेम […]

ज़िन्दगी इत्तेफ़ाक़ है

प्रतियोगिता : हम चार प्रतियोगिता टॉपिक : ज़िन्दगी इत्तेफ़ाक़ है राउंड : दूसरा रचयिता : सुनील मौर्या ज़िन्दगी इत्तेफ़ाक़ है ———————— कभी मुस्कान में छिपा दर्द, कभी आँसू में सुकून, कभी रास्ता हुआ तय, कभी मंज़िल हुई गुमसुम। कभी कोई अजनबी अपना बन गया, तो कभी अपना ही पराया लगने लगा। कभी वक़्त ने सिखाया […]

ए आई और इंसानी भावनाएं

प्रतियोगिता – हम चार विषय – ए आई और इंसानी भावनाएं ए आई का ज़माना इंसानियत को मार रहा दिखावे के चक्कर में इंसान खुद से हार रहा दौर ये कैसा आया हैं कवि भी सारे हैरान हैं इंसानी मेहनत पर ए आई वाहवाही लूट रहा कितनी खुश हैं महिलाएं वर्चुअल साड़ी पहन देखना भविष्य […]

जरा उनकी भी सोचो ( छोटे कारीगर और विक्रेताओं को समर्पित)

सीरीज 1 l राउंड 1 l प्रतियोगिता 9 ज़रा उनकी भी सोचो ————————— (छोटे कारीगर और विक्रेताओं को समर्पित) ज़रा उनकी भी सोचो, जो धूप में तपकर, छाँव की दुआ करते हैं, जिनके हाथों की लकीरें तक मिट जाती हैं। वो जिनकी साँसों में पसीने की ख़ुशबू होती है, पर आँखों में सपनों का समंदर […]

मर्यादित कौन

प्रतियोगिता – सीरीज़ 1, राउंड 1 विषय: मर्यादित कौन भाव: सामाजिक मर्यादा, सच्चाई और अन्याय पर प्रहार रावण को क्यों जलाते हैं, आज तक समझ आया नहीं,बुराई तो इंसान में है, रावण को फिर जलाने से हर बार रोका क्यों नहीं… हर साल पुतला जलता है, पर भीतर का रावण मुस्काता है, झूठ, घमंड, लालच […]

नई पीढ़ी और बदलते संस्कार

प्रतियोगिता – “आह्वान” विषय – नई पीढ़ी और बदलते संस्कार बदला जमाना, संस्कार भी बिल्कुल बदल गए नई पीढ़ी के बच्चे आदर, सम्मान भी भूल गए घमंड हुआ अमीरी का अहंकार हैं हावी हुआ संस्कारों के साथ युवा इंसानियत भी भूल गए रिश्ते सारे आज शॉर्ट फॉर्म में बिल्कुल बदल गए माता पिता थे जो […]

नई पीढ़ी और बदलते संस्कार

सीरीज 1 प्रतियोगिता 8 —————————— प्रतियोगिता : आह्वान प्रतियोगिता टॉपिक : नई पीढ़ी और बदलते संस्कार राउंड : एकल रचयिता : सुनील मौर्या नई पीढ़ी और बदलते संस्कार ———————————— नए समय की धड़कनें, नई सोच के हैं गीत, तकनीक की राह पर चलकर, बदली है रीत। कभी घरों में गूँजता था, मिलन का त्योहार, अब […]