Category: Hindi kavita

Hunkar

सीरीज -1 प्रतियोगिता-5 ‘हुँकार’ विषय- आग की तरह जलते सपने _____________________ नन्हीं आँखों मे जब भी कोई,स्वप्न पलने लगते है डगमग-डगमग चलने वाले,पांव संभलने लगते है जब छोटे-छोटे पंखो से ये,उड़ान ऊँची भरती है विषमताओं मे भी जब,गिरने से नही डरती है जब साहस की दीवारें इसकी,शिखर चूमने लगती है स्वयं सफ़लता मानो जैसे, कदम […]

Hunkar

प्रतियोगिता:”हुंकार ” सीरीज वन प्रतियोगिता:05 टॉपिक: जिंदगी:एक चौपाल ……………………………….. जिंदगी एक चौपाल है, जहाँ बिछता हर जाल हैं, कहीं खुशी कहीं गम समेटे, नियति ये भी एक कमाल हैं..!! हर दिन की तरह बिछता शतरंज कोई जीते कोई हारे, चौपड़ की बाजी खेलते सभी, पंडाव,कौरव कोई चाणक्य है..!! सभी खेले जिंदगी का जुआ, यहाँ,किसी के […]

डिजिटल भारत — पक्ष और विपक्ष

सीरीज 1 प्रतियोगिता 5 —————————— नाम : हुंकार प्रतियोगिता टॉपिक : डिजिटल भारत — पक्ष और विपक्ष राउंड : एकल रचयिता : सुनील मौर्या डिजिटल भारत — पक्ष और विपक्ष ——————————————- कभी खपरैल के नीचे बैठ, मैं मस्ती में, चाय की चुस्की लेता था, अब मोबाइल की स्क्रीन पर, किसी कविता को अंजाम देता हूँ। […]

Zindagi ki chupal

प्रतियोगिता ५ : ज़िंदगी एक चौपाल लगती थी चौपाल जब गाँव के बाहर, जहाँ बँटते थे दुख-सुख, होते थे विचार। ज़िंदगी भी कुछ वैसी ही मालूम होती है, मेरे-तेरे दिल की, बस एक सी बात होती है। कोई यहाँ बाँटता है ख़ुशी के पल, तो कोई रहता है दुखों में हर पल। कोई “अपना” बनकर […]

आग की तरह जलते सपने*

आग की तरह जलते सपने सपने… जिन्हें हमने अनगिनत रातों में सजाया, जिन पर हमने अपनी उम्मीदों का आंच दिया। वो सपने अब आग की तरह जलते हैं, हवा से नहीं, अपने इरादों की ताक़त से। हर जख्म, हर ठोकर ने उन्हें और भी प्रज्वलित किया, हर असफलता ने उन्हें और भी बुलंद बनाया। अब […]

डिजिटल भारत : पक्ष और विपक्ष

जमाना बदलता निरंतर और निरंतर बदलता ये भारत कहीं स्वच्छता ही सेवा तो कहीं बेटी पढ़ाओ की इमारत मजबूत इरादों की बुनियाद लाये हर चेहरे पे मुस्कुराहट आओ चलो मिलकर बनायें हम भारत को डिजिटल भारत सेवाओं के प्रचार से तरक्की की एक नई राह मिली नये कल के निर्माण की खातिर प्रगति की नई […]

समय की परछाइयां

प्रतियोगिता -(4) एकल राउंड ( शब्दों की माला ) विषय – ” समय की परछाइयां ” समय के साथ चलो या समय के आगे-पीछे समय हमेशा ही अपनी ओर हमें रहता खींचे इस धारा में हमें चाहे-अनचाहे बहते रहना है अपना मोल कितना है समय से कहना है ।। इसकी परछाई हर काम में दिख […]

Aatmsat

सीरीज 1 कविता प्रतियोगिता 4 —————————— नाम : शब्दों की माला प्रतियोगिता शीर्षक: आत्मज्ञान राउंड : एकल रचयिता : स्वाति सोनी युगों – युगों से बहती है ,जैसे गंगा की धारा नव भोर में सबसे पहला चमकता एक सितारा ऐतिहासिक खोह में खोजे नव परिवर्तन आत्मसात है आत्मजागृति,जिससे होता मंथन। निज पर शासन फिर अनुशासन […]

समय की परछाइयाँ

सीरीज 1 प्रतियोगिता 4 —————————— नाम : शब्दों की माला प्रतियोगिता टॉपिक : समय की परछाइयाँ राउंड : एकल रचयिता : सुनील मौर्या समय की परछाइयाँ ————————- कितना भी तुम कहीं भाग लो, ये परछाइयाँ साथ चलती हैं। वक्त की रेत पर लिखी लकीरें, इंसान को जीना सिखा देती हैं। कभी धूप बनकर चुभती है, […]

Samay ki parchaiya

सीरीज वन प्रतियोगिता 4 नाम. “शब्दों की माला” टॉपिक. “समय की परछाइयां ……………………………….. चुपके चुपके कोई बोला था, मैंने कान लगाकर सुना था, हौले से एक आवाज़ थी आयीं, भीतर की थी वो एक गहराई , बोली सुन मैं तो हूँ तेरी परछाई, मैंने उसकी आवाज़ थी दबायी, फिर एक रोज़ वो मेरे तकिये पर […]