“जयघोष” ( स्वरो का उत्सव, भावनाओं का जयघोष ) ख़याल विषय: जुनून ही पहचान राह कठिन हो चाहे, मैं हार न मानूँगी, तूफ़ानों के बीच भी, सपनों को जानूँगी। अंधियारे के बीच में, उम्मीद जगाऊँगी, अपने जज़्बातों से, इक नया जहाँ बनाऊँगी। गिरकर भी हर बार, फिर उठ खड़ी होऊँगी, चोटों के निशानों को, ताज […]
Category: Hindi kavita
मेहनत- एक मूलमंत्र
*प्रतियोगिता-3* *चरण- 1 जयघोष* *विषय : मेहनत : एक मूलमंत्र* बैठ मत तू अपनी किस्मत पर, कुछ पाना है तो मेहनत कर । थोड़ी सी तू हिम्मत कर, कर जतन और ज़हमत कर । रख हौंसला और मकसद कर, परेशानियों को तू रुख़सत कर । काम से तू मोहब्बत कर, काम में तू सदाक़त कर […]
सपनों की उड़ान (बेटी कहा उड़ पाती)
सीरीज वन प्रतियोगिता 03 जयघोष ( स्वरों का उत्सव, भावनाओं का जयघोष ) विषय – सपनों की उड़ान (बेटी कहा उड़ पाती ) बेटियां सपनों की उड़ान भर कहा पाती हैं बेटी होने की सजा वो पूरी उम्र ही पाती हैं भेदभाव की चक्की में हमेशा पिसती रहती बेटी भी एक इंसान ये दुनिया भूल […]
सपनों की उड़ान (बेटी कहा उड़ जाती)
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मैं ही परिवर्तन
प्रतियोगिता -3 (जयघोष) सीरीज वन विषय -” मैं ही परिवर्तन ” हूं ” मैं ही परिवर्तन” अगर हम सोच ले तो कर्म करना आसान हो जाएगा जुनून की सारी हदें पार होंगी परिवर्तन तब जाकर कहीं हो पाएगा ।। केवल परिवर्तन के सपने देखते रहे तो फिर यह कहां मुमकिन हो पाएगा जोश मेहनत लगन […]
सपनों की उड़ान
विषय- सपनों की उड़ान🕊🕊🕊🕊🕊 हमारे सपनों की उड़ान में कितनी तीर्व गति होती है, हम उड़ कर ना जाने कहाँ-कहाँ पहुंच जाते हैं। कभी हवा के झोंकों के साथ मस्ती करते हैं कभी बादलों का झूला बनाकर बैठ जाते हैं, कभी तारों के साथ खेलते हैं ,कभी चाँद से बतियाते हैं। कितनी आसान होती है […]
मेहनत: एक मूलमंत्र
मेहनत : एक मूलमंत्र सपनों की सीढ़ी चढ़ाता वही, जो दिन-रात मेहनत करता सही। ना किस्मत का खेल, ना भाग्य का मान, मेहनत से ही मिलता सम्मान। पसीने की हर एक बूँद कहे, सफलता उनके ही कदम चूमे। जो ठोकरों से डरता नहीं, वही मंज़िल तक रुकता नहीं। राह चाहे कितनी ही कठिन, मेहनत से […]
मेहनत एक मूल मंत्र
प्रतियोगिता ३ :चरण १ मेहनत एक मूल मंत्र चलता चल तू, चलता चल, मेहनत है अपने हाथ में। उठ चल, अपनी किस्मत अब खुद ही लिख अपने साथ में। मत पाल कोई संशय, कोई भ्रम, तेरे हिस्से के कर्म — ना टाल किसी और पर। आलस को त्याग कर कर्म को प्रधान रख । आज […]
मैं ही परिवर्तन
मैं ही परिवर्तन सन्नाटे में जो पहली पुकार गूँजती है, वो मेरी ही आवाज़ होती है। भीड़ में जो अकेला खड़ा दिखता है, वो मैं ही हूँ, जो रास्ता बदलता है। लोग कहते हैं – वक़्त बदलता है, पर सच्चाई ये है कि बदलता तो इंसान है। और जब इंसान बदलता है, तभी वक़्त की […]
Jay ghosh – swaron ka utsav
सीरीज १ प्रतियोगिता ३ शीर्षक ( मैं ही परिवर्तन) नव भारत के उत्थान का लिए सुदृढ़ समर्थन दिव्य, तेजस मूल रूप से बनता सार्थक सृजन क्यों ढूंढे कहीं ओर तू जब मिलता कहीं अंतर्मन बढ़ता चल निरन्तर,निहित जब स्वयं में ही परिवर्तन। युग बदले बदले इंसान , गर कभी न जो बदला वो कहलाए महान […]
