Category: Hindi Shayari

सांस लेती जिंदा लाश

सांस लेती जिंदा लाश कभी धड़कते थे अरमान उसके सीने में, अब बस खामोशी का बसेरा है उसके चेहरे में। सपनों की वो मिठास, उम्मीदों की वो रोशनी, सब कहीं खो गई, पीछे छूट गई बस एक वीरानी। हर सुबह उठती है, पर आंखों में उजाले नहीं, हर शाम ढलती है, पर मुस्कान की चमक […]

“राष्ट्र प्रथम”

राष्ट्र प्रथम मेरे लहू की हर बूंद में बसा है तिरंगे का मान, साँस-साँस कहती है – भारत मेरा अभिमान। धरती से गगन तक पर्वत से सागर तक, हर कोना गाता है राष्ट्र प्रथम है, सब कुछ उसके बाद। जब भी देखता हूँ लाल किले पर लहराता तिरंगा, रग-रग में दौड़ जाती है एक अनोखी […]

जुनून ही पहचान

सीरीज वन प्रतियोगिता : 03 ” जयघोष ” विषय : जुनून ही पहचान मैं जुनून-ए मसाफ़त में घर से निकला था, मैं खुद की पहचान बनाने घर से निकला था… .. आबोहवा ने रोका,मैं कर-गुजरने निकला था, बेड़ियाँ थी पैरों मे, जब मैं अकेला निकला था… .. कितनी बे-अदब है दुनियां, फिर ये जाना था, […]

मैं ही परिवर्तन

मैं ही परिवर्तन सन्नाटे में जो पहली पुकार गूँजती है, वो मेरी ही आवाज़ होती है। भीड़ में जो अकेला खड़ा दिखता है, वो मैं ही हूँ, जो रास्ता बदलता है। लोग कहते हैं – वक़्त बदलता है, पर सच्चाई ये है कि बदलता तो इंसान है। और जब इंसान बदलता है, तभी वक़्त की […]

शब्दों से बदलाव

शब्दों से बदलाव शब्द… ये छोटे-छोटे अक्षर ही तो हैं, पर इनसे पूरी दुनिया का चेहरा बदल जाता है। एक शब्द से जंग छिड़ जाती है, और एक शब्द से अमन का रास्ता बन जाता है। एक शब्द किसी को तोड़ देता है, और वही शब्द किसी को जीने की वजह बना देता है। समाज […]

कलम बनाम तलवार

कलम बनाम तलवार तलवार कहती है – मैं लहू से इतिहास लिखती हूँ, मेरे वार से साम्राज्य झुकते हैं, सत्ता मेरे साये में पलती है, मेरी धार से डरकर ही राजनैतिक सच मुखर होते हैं। कलम मुस्कुराकर कहती है – तेरे वार से सिर झुक सकते हैं, दिल नहीं… मैं जख़्म नहीं देती, बल्कि मरहम […]

तलवार बनाम कलम

प्रतियोगिता – शब्दों की ताक़त (कलम से आवाज़ तक) प्रथम चरण विषय – कलम बनाम तलवार सुनो कलम मैं तलवार हूं तुमसे तेज चलती हूं योद्धा के हाथ में जाते ही रक्त भी बिखेरती हूं लक्ष्मीबाई ने मुझको अपना साथी था बनाया सदियों से ही मैं तो वीरों के पास ही रहती हूं कितनी शौर्यगाथा […]

मजबूरी

प्रतियोगिता “शब्दों की अमृतवाणी” सीरीज 1, फाइनल राउंड टॉपिक ‘मजबूरी’ __________________________ तपती धूप में, बूढ़ी काया, झुकी पीठ पर जीवन की छाया। जिस उम्र में खुद का बोझ संभाला ना जाए, उसी उम्र में वो औरों का बोझ उठाए। जिन बच्चों का पालन-पोषण वो करता जाय, मुस्कान आती चेहरे पे उसके, अगर वो बच्चे भी […]

हर चुनौती तुम्हें विजेता बनती है जिंदगी की

*सेकंड राउंड* विषय:- *हर चुनौती तुम्हें विजेता बनती है जिंदगी की* जीवन हर मोड़ पर इम्तिहान रखता है, और संघर्ष ही इंसान की पहचान रखता है। बूढ़ा शरीर, काँपते कदम, फिर भी मुस्कुराता, समय की मार झेलकर भी हिम्मत दिखाता। दो हाथ नहीं, पर हौसले परवान हैं, पैरों से चलता ट्रैक्टर, यही उसकी जान है। […]

सोच और प्रतिष्ठा

सोच और प्रतिष्ठा सत्तर-अस्सी बरस का बूढ़ा, थका हुआ शरीर, काँपते हुए हाथ, फिर भी मेहनत करता है रोज़, कि परिवार का चूल्हा बुझ न पाए, पेट की आग शांत हो जाए। वहीं कुछ जवान, हड्डियाँ मज़बूत, साँसों में उमंग, पर आदत है सहारे की, दूसरों के कंधों पर जीते हैं और कहते हैं – […]