Category: Hindi Shayari

गांव का वो बचपन

*गांव का वो बचपन*… कच्ची पगडंडियों पर दौड़ता नन्हा सा मेरा साया था मिट्टी की सोंधी खुशबू में बचपन हर पल नहाया था.. खेतों की मेडो पर चुपके से सपनों का रेल चलता हल्की हवा में सरसर करता गेहूं का हर एक बाला झुलता खलिहान में उठती थी जैसे खुशियों की लहर पुरानी बगिया में […]

गाँव का बचपन और उसकी यादें

गाँव का बचपन और उसकी यादें गाँव की पगडंडी पर मिट्टी से सने पाँव, दादी की गोद में सुनाई देती रामायण की छाँव। खेतों में दौड़ते हुए हँसी का जो रंग था, वो अब शहर की गलियों में कहाँ ढूँढा गया संग था। आम के पेड़ पर चढ़कर छुपा लेना खजाना, बरसात में भीगकर मिट्टी […]

एक काल्पनिक पत्र महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जी के नाम

प्रिय चंद्रशेखर आज़ाद जी, (पंडित चंद्रशेखर तिवारी जी) प्रणाम 🙏🏼 आज आपको यह पत्र लिखते हुए मन बहुत भावुक हो रहा है। लगता है जैसे आप यहीं कहीं पास खड़े हों और अपनी वही चमकती हुई आँखों से देख रहे हों। माथे पर तेज, आँखों में हिम्मत और होंठों पर वो अडिग वचन – “आज़ाद […]

भविष्य का एक नागरिक

भविष्य का एक नागरिक विद्या :-स्वैच्छिक पत्र काल्पनिक पात्र के आधार पर शैली;- प्रिया मेरी आज के दुनिया के लोगों लिए मैं दिखाती हूं आपको अपनी मासूम आंखों से आज की दुनिया का आईना मैं वर्ष 2085 के भविष्य की एक नागरिक को स्वाति मैं मात्र अभी 19 साल की हूं और आज अपनी कॉपी […]

सलाम तिरंगा

बात गर वतन की है तो बस यही पहचान है लहू के एक-एक कतरे में बहता हिन्दुस्तान है कुछ कर गुज़रे कि , जहाँ में हो नाम इसका है अपनी यही ख्वाहिश , दिल में यही अरमान है अपनी माट्टी से उल्फ़त अपने वतन से मोहब्बत है मज़हब हमारा , यही धर्म , यही इमान […]

सलाम तिरंगा

बात गर वतन की है तो बस यही पहचान है लहू के एक-एक कतरे में बहता हिन्दुस्तान है कुछ कर गुज़रे कि , जहाँ में हो नाम इसका है अपनी यही ख्वाहिश , दिल में यही अरमान है अपनी माट्टी से उल्फ़त अपने वतन से मोहब्बत है मज़हब हमारा , यही धर्म , यही इमान […]

वो तोड़ती पत्थर

वो तोड़ती पत्थर धूप में तपता बदन, फिर भी छांव की उम्मीद लिए, हर वार हथौड़े का, जैसे किस्मत से जंग किए। कंधे से बंधा बच्चा, कभी हँसे, कभी रो दे, माँ की आँखों में चमक हो, या थकावट का मोड़ ले। ना शिकवा है, ना कोई आह, उसके सपनों में बस है – बच्चों […]

अब यह चिड़िया कहां रहेगी

अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी (चिड़िया की व्यथा) पेड़ों की शाखें अब कहां बची हैं, हर दिशा में इमारतें ही खड़ी हैं। जिस डाल पर बैठ गुनगुनाती थी, आज वहाँ मशीनें शोर मचाती हैं। नीड़ उसका सपना बन गया, वो कोना भी अब छिन गया। शिकारी छुपकर आते हैं, जालों में सपने फँसाते हैं। ना […]

नेता बदलते हैं, नीयत नहीं

नेता बदलते हैं, नीयत नहीं हर पाँच साल में भीड़ जुटी, फिर वही वादों की पोटली खुली। चेहरे बदले, चाल वही थी, नीति-नीति कह, राजनीति चली। हाथ जोड़े, झूठे वादे, भाषणों में फिर उड़ते बादे। “हम लाएंगे परिवर्तन!” का नारा, पर फिर वही पुराना किनारा। कभी धर्म की बात चली, कभी जाति की चाल चली। […]

“न्यूज़ एंकर बनाम न्यूज़”

“न्यूज़ एंकर बनाम न्यूज़” कभी अख़बार की सुर्खियों में सच्चाई सांस लेती थी, कभी न्यूज़ चैनल लोगों की आवाज़ बनते थे। आज वो आवाज़ें बिक चुकी हैं, अब खबरों की जगह ड्रामा और हंगामा परोसा जाता है। जो मुद्दे खेतों की मिट्टी और किसानों की मेहनत से उठते थे, अब वो स्टूडियो की गर्म रोशनी […]