प्रतियोगिता : बोलती क़लम विषय : अजनबी अपने ही घर में हम अजनबी अपने ही घर में हो गये, बा-ख्याल इश्क़ में यूँ बर्बाद हो गये… .. कमरे की दीवारों-दर चीखते रह गये, ख़्वाब ख़ाक हुये, हम देखते रह गये… .. उनसे क्या कहे, सोचते ही रह गये, कुछ घाव फिर यूँ, नासूर ही रह […]
Category: Hindi Shayari
अजनबी अपने ही घर में
तेरी बातों में आ कर रख दिया है, ले, हमने दिल जला कर रख दिया है। जहाँ पर बे-कली थी, उस जगह पर किसी ने सब्र ला कर रख दिया है। वो तेरा हिज्र है कि जिसने कमरा किताबों से सजा कर रख दिया है। तेरी तस्वीर लगनी थी जहाँ पर, वहाँ शीशा लगा कर […]
अजनबी अपने ही घर में
कभी की जिन दीवारों से बात, आज वो भी लगती हैं अनजान। जहाँ हँसी गूंजा करती थी, अब बस खामोशी का है सामान। क्या आज मुझसे है सभी परेशान, “अजनबी अपने ही घर में” क्यों में बन गई एक अजनबी मेहमान? अपनों की मुस्कानें जो कभी खिलती थीं, अब वो फीकी और बेमन सी लगती […]

