Category: Competition

दिल से दिल तक

प्रतियोगिया *दिल से दिल तक*~ टॉपिक : *मेरी अनमोल मोहब्बत*~ नाम लूं उसका तो जन्नत नज़र आती है , उसकी खुशुबू जैसे हवाओं में बिखर जाती है , नहीं देखा था मैंने उस खुदा को कभी , मगर मोहब्बत उसकी मुझे सज़दा सिखाती है । यूँ रोज रोज मिलने की मन्नत करता था वो , […]

दिल से दिल तक

सीरीज 1 प्रतियोगिता ————————— प्रतियोगिता का नाम : दिल से दिल तक कविता शीर्षक : प्रेम का उजाला राउंड : एकल रचयिता : सुनील मौर्या प्रेम का उजाला ——————- तेरी मुस्कान से शुरू होती है मेरी हर सुबह, तेरे संग दिल खिल उठता है गुलाब की तरह। तेरे पास होने से महक जाती हैं मेरी […]

सकारात्मक प्रेम

प्रतियोगिता – दिल से दिल तक विषय – सकारात्मक प्रेम प्रेम का नाम सुनते ही दिल में उमंग उठता हैं हर पहर मुझको बस एक ही चेहरा दिखता हैं जादुई उसकी आँखें, उसके सुर्ख होंठ हैं शिवोम करता जब श्रृंगार तब सनम मेरा संपूर्ण लगता हैं उसके साथ ही मैंने ज़िंदगी को भी खूब जिया […]

जाम ए इश्क – प्रतियोगिता: दिल से दिल तक

प्रतियोगिता:दिल से दिल तक *जाम-ए-इश्क़* चलिए…. इस शब-ए-विसाल को ताबीर दें, हर अहद-ए-वफ़ा को नई तस्वीर दें। बहुत हो चुका हिज्र का ये लम्बा सफ़र, बस अब लम्हा-ए-दीदार की तकबीर दें। लबों पे आज मेरा नाम-ए-इश्क़ ही रहे, नज़र में बस तेरी जाम-ए-इश्क़ ही रहे। ये रात, ये बात, ये वक्त की हरकते गवाह हैं, […]

इश्क़

प्रतियोगिता दिल से दिल तक इश्क़ न जुल्फों में मुझ को उलझाने की सोच ग़र इश्क़ है मुझ से निभाने की सोच न फ़िक्र कर किसी की न ज़माने की सोच सिर्फ़ मेरे करीब तू आने की सोच सुकून मेरी जिंदगी में लाने की सोच मेरे ज़ख्मों पे मरहम लगाने की सोच मुझ को अब […]

Zindagi or tum

जिंदगी और तुम-प्रेम का अन्नत रूप क्या कहु तुम क्या हो मेरे लिए ! तुम धड़कन का संचार हो मेरे जीवन का अरमान हो जो ना बुझे वो प्यास हो तुम हर पल जगती आस हो तुम प्रेम हो , तुम पूजा हो तुम मेरे लिए कोई देवता महान हो .. क्या कहु तुम क्या […]

तेरे साथ

तेरा साथ तेरी धड़कनों से जुड़ी है मेरी हर सांस, तेरी हँसी से खिल उठता है मेरा जहाँ खास। तेरी आँखों की चमक है मेरी रौशनी, तेरे ख्यालों से ही मिलती है ज़िन्दगी। तेरी बातों में छुपा है सुकून का जहाँ, तेरे संग हर लम्हा है इक ख़ूबसूरत दास्तां। तेरी मौजूदगी से महकते हैं सारे […]

हुस्न

हुस्न की तारीफ़ में, न जाने कितनी ग़ज़लों को नाम मिला… लब-ओ-रुख़सार से, नज़्म-ए-जमाल का पैग़ाम मिला… पर्दे में रख्खा उन्हें… मगर रज़ कहाँ रज़ रहा… हर कोचे-कोचे में… उनके जल्वा-ए-गुलफ़ाम मिला… वो दिखती हैं क़यामत… या क़यामत ढलती है उनसे… दीदार-ए-नाज़नीं से… आफ़ताब-ए-गुलिस्ताँ मिला… सौदा-ए-दिल में… आशिक़ नियाज़ बे-ख़ुद-ओ-मस्त हुआ… साक़ी-ए-निगाह से… हर दम […]

ज्योत

प्रतियोगिता – ज्योत विषय – परिवर्तन का प्रतीक मां तेरे दर्शन मात्र से मिटती हैं सारी तकलीफ़ तेरा रूप हैं मनमोहक तू ही हैं शक्ति का प्रतीक तेरी भक्ति से अहंकार भी नष्ट हो जाता हमारा तेरे ही नाम से होती बुराई पर सच्चाई की जीत परिवर्तन का प्रतीक दिखता ज्वाला की ज्योत में वैष्णो […]

ज्योत: परिवर्तन का प्रतीक

ज्योत: परिवर्तन का प्रतीक अँधेरों में जब राहें गुम हो जाती हैं, तो एक छोटी-सी ज्योत भी दिशा दिखा जाती है। यह सिर्फ़ रोशनी नहीं, आशा की किरण है, जो कहती है— हर अंधकार का अंत निश्चित है। ज्योत जलती है तो स्वयं को मिटाती है, पर अपने चारों ओर उजियारा फैलाती है। सिखाती है— […]