Dharam or Prem ka sangam

बन जाओ अगर तुम अवध के राम से,
मथुरा के घनश्याम से,
मैं बन जाऊँ सीया तुम्हारी
या राधा तेरे नाम से,

धर्म भी तुझसे सीखूँ मैं,
और प्रेम भी तुझसे जानूँ,
१४ वर्ष क्या जीवन भर
वन में तेरा संग गुजारूँ मैं,

बन जाओ अगर तुम राम से,
अग्नि परीक्षा भी दे दूँगी
बन जाओ अगर तुम घनश्याम से
प्रेम में विरह भी सह लूंगी,

बस एक वचन तुम दे देना,
हर जन्म में तुझपे सिर्फ
मेरा ही अधिकार रहे
सुख में मेरी छाया तू और
दुःख में तू मेरा धैर्य बने,

ना चाहिए महल अवध का और
ना मथुरा की बंसी
नाम तेरा जपते जपते
मेरी साँसें भी थम जाएँ,

बन्धन ऐसा हो जन्म जन्म का
जो तोड़े से भी न टूटे
आय कभी अंधेरी रात
दीपक बन तू जल जाए,

हा बनो तुम राम से
बस मर्यादा के खातिर
तुम मुझसे अलग न हो जाना,
हा बनो तुम घनश्याम से
बस छोड़ के हाथ मेरा
तुम मुझको ना तड़पाना,

इस घोर कलयुग में
राम भी तू मेरा
घनश्याम भी तू
मेरा पूरा संसार भी तू..

Updated: February 27, 2026 — 9:55 pm

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