Intjaar

*वैलेंटाइन डे लेखन प्रतियोगिता 2026*

विषय – “प्रेम”
विधा – कहानी
शैली – भावनात्मक

“इंतजार”

अभय इंडियन आर्मी का एक जाबाज़ और सबसे काबिल ऑफिसर में से एक है, हाल ही में उसकी सगाई उसके माता पिता के पसंद की लड़की (वैशाली) से हुई थी, उसकी शादी होने में बस दो हफ़्ते ही बाकी थें मगर अभय को अर्जेंट में एक जरुरी मिशन के लिए जाना पड़ गया था ।

अभय जल्दबाजी में अपना सारा सामान पैक करके वहाँ से निकल गया, वैशाली का घर दूसरे शहर में था इसीलिए अभय चाहकर भी उससे मिल नहीं सकता था, लेकिन उसने जाने से पहले वैशाली के नाम एक लेटर लिखकर अपने छोटे भाई को दे दिया था, जिससे वो उस लेटर को वैशाली के पास पहुँचा दे, पूरा घर अभय के अचानक जाने से वैसे ही परेशान और डरा हुआ था, इसी वज़ह से अभय के छोटे भाई को अपनी होने वाली भाभी को वो लेटर देना भूल गया, उसने उस लेटर को अपने वॉलेट में ही रख लिया ।

एक हफ्ते बाद खबर आई कि अभय जिस मिशन में गया था वहाँ वो लापता हो गया है, सारा परिवार परेशान था क्योंकि अभय का कही पता नहीं चल रहा था, जैसे ही वैशाली और उसके परिवार वालो को पता चला सब परेशान हो गयें, शादी में अब एक ही हफ्ता बाकी था, सभी अभय के घर आ गए, वैशाली का रो-रोकर बुरा हाल था कही न कही उसने अभय के साथ अपने आने वाले भविष्य के सपने देखने शुरू कर दिए थें ।

सबने हिम्मत हार ही दी थी, मगर वैशाली और अभय की माँ ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी, फिर भी सभी वैशाली को समझा रहे थें, वैशाली के घर वाले एक-दो रुककर अब वापस जाना चाहते थें लेकिन वैशाली ने जाने से इनकार कर दिया, सभी ने उसे समझाया पर उस पर तो जैसे भूत सवार था, अभय के पापा ने वैशाली के पिता से कहा कि वो उसे समझा-बुझाकर वापस घर पहुँचा देंगे, तब ही सभी वापस गयें ।

रात में अभय के भाई को याद आया उसके पास अभय का दिया हुआ वैशाली के लिए लेटर था, तो उसने वैशाली को दे दिया उसे लगा शायद इस लेटर को पढ़कर वैशाली वापस चली जाए, वैशाली ने अभय का लेटर पढ़ना शुरू किया ।

वैशाली माफ कीजिएगा मुझे, मै आपको बिना बताए जा रहा हूँ बात ही ऐसी है, एक बहुत जरूरी मिशन के लिए जाना पड़ रहा है, फौजी हूँ तो खतरा हर पल रहता है हमें, लेकिन इस बार हद से ज़्यादा है, पर मै आपको बता नहीं सकता, पता नहीं वापस आऊँगा भी या नहीं ये भी नहीं पता मुझे ।
अब जो कहने जा रहा हूँ इसके लिए बहुत हिम्मत जुटाई है मैने, पता है आपको बुरा लगेगा लेकिन यही सच है, वैशाली अभी बस हमारी सगाई ही हुई है, इसीलिए मेरी तरफ से आप आज़ाद हैं अगर मै वापस आया तो शादी होगी ही, पर वापस नहीं आया तो आप किसी को पसंद करके शादी कर लीजिएगा, मै दूर कही आसमान से आपको खुश देखकर खुश हो लिया करूँगा ।
आपकी खुशी चाहने वाला अभय …. ।

वैशाली ने लेटर पढा और खूब रोई उसे गुस्सा भी आ रहा था लेकिन वो कुछ कर नहीं सकती थी सिवाय “इंतजार” के, अब उसने एक फैसला लिया वो अभय का इंतजार करेगी वो आए या न आए लेकिन वो ये घर छोड़कर नहीं जाएगी, फिर चाहे जो भी हो ।

इसी तरह से शादी का दिन भी गुजर गया और करीब एक महीने बाद एक दुबला पतला सा इंसान घर आया, पर सभी उसे पहचान गयें वो अभय था, इतने दिनों में वो बेहद कमजोर हो चुका था, जिससे ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, सबसे मिलने के बाद जब उसकी नज़र वैशाली पर गई तो वो हैरान रह गया क्योंकि वैशाली बहुत खूबसूरत थी पर अब उसका चेहरा बुझा-बुझा सा लग रहा था, सबसे मिलने और बात करने के बाद अभय को उसके भाई ने रूम में पहुँचा दिया, वैशाली उसके कमरे में पानी रखने आई और एक नज़र उसे देखकर जाने लगी ।

अभय ने धीरे से कहा आप यहाँ कैसे… ।
वैशाली ने खुद को संभालते हुए कहा आप आराम कीजिएगा, अभी आप ठीक नहीं हैं ।
अभय ने कहा आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया, आप यहाँ कैसे … ।
वैशाली ने कुछ न कहा तो अभय ने कहा अगर मुझे कुछ हो जाता तो आप क्यूँ अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही हैं यहाँ ।
वैशाली ने गुस्से से कहा मै मेरे होने वाले पति का इंतजार कर रही हूँ आपको क्या है हाँ.., मानती हूँ कि मै किसी और को चुन सकती थी पर मैने आपका इंतजार किया, मुझे भरोसा था आप जरूर आएँगे और कुछ जानना है या अब मै जाऊँ ।
अभय ने मुस्कुरा कहा शादी कब करनी है… ।
वैशाली ने मुँह बनाकर कहा पहले ठीक हो जाइए, बड़े आयें शादी करने वाले ।
वैशाली अपने कमरे में चली गई और अभय चुपचाप चैन की नींद सो गया… ।

© अरुण प्रताप सिंह “आर्या”

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