नाम – चन्दन नाविक ‘विनम्र’ विषय – प्रेम (खुली कविता) वतन से प्रेम करते हैं वतन पर जाँ लुटाते हैं, फँसोगे उनके चंगुल में तो तुम किसको पुकारोगे, कफ़न सर पर जो अपने बाँध कर घर से निकलते हैं, वतन पर मर मिटे हैं जो तुम उनको क्या ही मारोगे, हम उनकी ख़ुशियाँ उनसे छीन […]
