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Dharam or Prem ka sangam

बन जाओ अगर तुम अवध के राम से, मथुरा के घनश्याम से, मैं बन जाऊँ सीया तुम्हारी या राधा तेरे नाम से, धर्म भी तुझसे सीखूँ मैं, और प्रेम भी तुझसे जानूँ, १४ वर्ष क्या जीवन भर वन में तेरा संग गुजारूँ मैं, बन जाओ अगर तुम राम से, अग्नि परीक्षा भी दे दूँगी बन […]

Prem

प्रेम !! प्रेम त्याग हैं प्रेम राग हैं,, एक छोटी सी ख्वाहिश का अनुराग हैं!! कुछ सुनना हैं, कुछ सुनाना हैं!! बड़ी सी दुनिया में किसी के दिल में,, एक घर बनाना हैं!! मतलबी सी दुनिया में ,, बेमतलब किसी का बन जाना हैं!! एक सुर हैं उसके होने पर ,, कभी यादों में सरगम […]