मोहब्बत एक एहसास है
जो अमीरी या गरीबी से नहीं जुड़ा।
यह तो एहसास है जो दिलों से उपजता है
और निगाहों से पनपता है
और पहुँच जाता है मन की उस गहराई तक,
जहाँ कोई दूसरा फिर नहीं भाता है।
कुछ ऐसा ही प्यार हुआ आरव और सना को।
उनकी पहली नज़र का प्यार कब उनके मन की गहराई तक पहुँच गया,
उन्हें खुद भी पता न चला।
पनपता गया उनका प्यार और गहरा हो गया।
एक-दूसरे को पाने का जुनून छाने लगा।
फिर उन्होंने परिवार की हामी चाही अपने रिश्ते पर।
लेकिन दोनों के परिवार उनकी खुशी में शामिल न हुए,
बल्कि साज़िश में शामिल हुए।
दोनों के बीच गलतफहमी बढ़ाने के लिए गलत मैसेज दोनों को कर दिए गए।
और दोनों ने प्रमाणित माना कि एक-दूजे ने ही मैसेज भेजे हैं और उनमें दूरियाँ आ गईं।
लेकिन जब कुछ समय बाद दोनों का सामना हुआ, कुछ दिखाई न दिया।
निगाहें निगाहों से सवाल कर रही थीं कि, “आरव, तुमने ऐसा क्यों किया?”
तब आरव ने निगाहों का जवाब बोलकर दे दिया। फिर सना ने भी समझा कि बेशक गलतफहमी का बीज बोया गया, लेकिन उसे खाद-पानी देकर हमने भी बढ़ने दिया, यानी रिश्ते में एक मज़बूत नींव की कमी थी।
और सना ने बात समय पर छोड़ दी कि, “समय ने चाहा तो हम ज़रूर मिलेंगे।”
आरव ने कहा, “क्या बिना मिले ये प्यार मुकम्मल नहीं?”
इससे उसके प्यार की गहराई का पता चलता है। शायद भविष्य में सना और आरव एक हो जाएँ।
लेकिन क्या हासिल करना ही प्यार है?
“प्यार के असल मायने एक-दूसरे को देखने में नहीं, बल्कि दोनों का एक-सा देखने में है।”
किरण बाला
