,कलम की धार तलवार से तेज ………………………………… जब से औरतों को भी ये हक मिला , क़लम को उसकी धार मिला, तलवार से भी तेज उसने इसका इस्तेमाल किया , औरत ही औरत की दुश्मन बनी बैठी, थी जब तक वो निरक्षर थी , हक मिला उसको लड़ने का खुद के, संग औरों की किस्मत […]
Category: Hindi kavita
कलम की धार तलवार से तेज़
प्रतियोगिता: “बोलती कलम” टॉपिक: “कलम की धार तलवार से तेज़” “कलम की धार, तलवार से तेज़”, इसकी नोक से निकले जो अल्फ़ाज़, बदल दे ये दुनिया, जगा दे आवाज़। बीती सदियों का क्या होता निशान, अगर न होती ये अक्षरों की ज़ुबान। कलम न लिखती गर इतिहास, तो गुम हो जाता हर एक राज़। तलवार […]
कलम की धार,, तलवार से तेज़
विषय _____कलम की धर,,, तलवार से तेज़ कलम की नोक में जबसे ये धार आई है तेज़ धार की तलवार डगमगाई है सलीका हमको बताया हिसाब करने का हमारे हक में जो होने लगी बुराई है तमाम हटने लगे चार साज़ी से पीछे जब अपने हक में हमने कलम उठाई है जब से समझ आई […]
Mai samy se shikwa nhi krti
प्रतियोगिता- बोलती कलम मैं समय से शिकवा नहीं करती रात के अंधेरों से कहाँ है डरती बात – बात पर कहाँ है लड़ती……. समय का वह पहिया, जो जीने की राह पर चलती, तर्जूबा मिला है जिंदगी से जो बड़ते कदम को ना रोक पाती….. मुश्किलें चाहें लाख आती, जिंदगी कहाँ आसान हो पाती, सूर्य […]
मैं समय से शिकवा नहीं करती
प्रतियोगिता-‘बोलती कलम’ शीर्षक-“मैं समय से शिकवा नहीं करती” मैं समय से शिकवा नहीं करती… क्योंकी उसने छीना कुछ भी नहीं, बस वक़्त के साथ सीखा गया बहुत कुछ, वो बचपना, वो नादानियाँ अब मैं करती नहीं। इस भीड़ भरी दुनिया में कहीं खो जाऊँ… किसी की बातों मे यूँ ही बहँ जाऊँ, वो लड़की…अब मैं […]
मैं समय से शिकवा नहीं करती
विषय – मैं समय से शिकवा नहीं करती। मैं समय से शिकवा नहीं करती, समय ने ही यह सत्य दिखाया है, पास समय नहीं था मेरे लिए , हर एक आज आंसू बहाने आया है। हाँ आज जीवन को विराम मिला है, मुझे कुछ राहत और आराम मिला है, दो मिनट समय भी जो मुझे […]
मैं समय से शिकवा नहीं करता
खुला आसमान फिर भी यादों के बादल घेरे हुए हैं, चंद्रमा है आकाश में फिर भी रात में अंधेरे हुए हैं, देखता हूं तो कुछ दिखता नहीं मुझे कुछ शायद ये, सच है यार इन आंखों में बस तुम्हारे ही डेरे हुए हैं।। देखो काली रात के बाद से आज सुंदर सबेरे हुए हैं, इनकी […]
मैं समय से शिकवा नहीं करती
प्रतियोगिता -( बोलती कलम ) विषय – “मैं समय से शिकवा नहीं करती ” जो कुछ भी वक्त ने दिया वह कम नहीं माना खुशियां थोड़ी सी थी मगर ग़म नहीं है खुशनसीब इनके साथ क़दम चलते हैं मेरे सच है ‘मैं समय से शिकवा नहीं करती’ ।। उतार-चढ़ाव सदा लाती रहेगी ज़िंदगी इसके साथ […]
मैं समय से शिकवा नहीं करता
टॉपिक:-मैं समय से शिकवा नहीं करता मैं समय से शिकवा नहीं करती, हर पल को जीने की कोशिश करती हूँ। बीतते लम्हों को रोक नहीं सकती, पर उन्हें यादगार बनाने की कोशिश करती हूँ। समय की चाल को बदल नहीं सकती, पर अपनी सोच को बदलने की कोशिश करती हूँ। वक्त की मार को सहन […]
मैं समय से शिकवा नहीं करती
विषय – मैं समय से शिकवा नहीं करती…. न मिला हो कहीं ठिकाना तो क्या , मैं ठोकरों से नहीं डरती, मैं बदलना जानती हूँ हालात अपने हिसाब से , तभी मैं समय से शिकवा नहीं करती…..। कौन आया था और क्या किया किसने , खुशियां दी या फिर ग़म दिया उसने , मैं बैठकर […]
