कितने स्वार्थी और मतलबी हैं ये मानव, दो गज जमीन के लिए अपनों से भी लड़ जाते हैं। वो भला मेरी पीड़ा क्या समझेंगे, जो निजस्वार्थ के लिए हमें नष्ट कर जाते हैं। कभी मेरी छाँव में बैठ अपनी थकान मिटाते थे, वहीं आज घरों में कूलर-पंखा चला, बड़े ठाठ से रहते हैं। हो रहा […]

