मुकम्मल इश्क़

टॉपिक ___ मुकम्मल इश्क़

उसे देखा तो लगा , खुदा की रहनुमाई देख ली हमने,
कॉलेज में पहले दिन इश्क़ की रोशनाई देख ली हमने।

इन आंखों ने देखा उसको तो दिल को अहसास हुआ,
आसमान से आई , अप्सरा की परछाई देख ली हमने।

……..

प्यार का दिया जला है मुफलिसी को दरकिनार करके,
बारिश ने भी साथ दिया, मौसम को सदा बहार करके।

राह – ए – मोहब्बत में निकले हो तो इल्म रहे मेरे दोस्त,
हमको तन्हा छोड़ न देना,मोहब्बत का इज़हार करके।

……….

निकल पड़े हैं ग़र घर से , इश्किया नगमे गाने के लिए,
लड़ना होगा हमें, मोहब्बत की आबरू बचाने के लिए।

एक मैसेज ने फिर उड़ा दिया है , मोहब्बत का मज़ाक,
शुक्रिया मेरे यारा , हमें हमारी औकात बताने के लिए।

ये है ग़म ए मोहब्बत, कोई आईने से पूछता है सच्चाई,
कोई तारों से बात करता है तन्हा रातें बिताने के लिए।

एक दूसरे के लफ्ज़ ही एक दूसरे के लिए सदाकत हों,
कुछ साजिशें की गईं थीं , हमको जुदा कराने के लिए।

…….

मिट गई है दिल की बेकरारियां , तमन्नाएं जदीद हुई हैं,
अरसे बाद एक दूजे की नज़रें एक दूजे की दीद हुई हैं।

अश्कों और खामोशियों ने दिल की कह दी हैं सच्चाई,
तुम्हे क्या मालूम, ये काली रात भी प्यार की ईद हुई हैं।

………

किया मोहब्बत तो आशिक़ ज़माने से नहीं डर सकता,
मोहब्बत है एक त्याग जिसे हर कोई नहीं कर सकता,
प्यार के कागज़ में , दिल की कलम से उतारा है हमने,
जुदा होकर भी प्यार हमारा , कभी नहीं मर सकता।

…….

आज हमारी आख़िरी मुलाक़ात है चेहरे पे रोशनाई है,
मोहब्बत की परिभाषा , हमको भी तो समझ आई है,
हर कहानी को ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ देना है *राव*,
क्या हंसना , क्या रोना , क्या मिलना , क्या जुदाई है?

✍️ ___ राव साहब ❤️

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