विषय- “अजनबी अपने ही घर में ” चेहरे पे नक़ाब की चादर लिपटी हैं, जब आईने में नजर खुद से मिलती हैं, बिन कहे पलकों से बारिश गिरती हैं, कोई देख न ले…इसलिए अधरों पे मुस्कान होती हैं। यूँ तो चारों ओर से घिरी हुई हूँ, अपनो की इस भिड़ में फिर भी अकेली हूँ… […]
Category: Hindi kavita
अजनबी अपने ही घर में
अजनबी अपने ही घर में, खोया सा मन, राहों में भटके। दीवारें चुप, साये ठहरे, यादें पुरानी, अब सपनों में थके। कभी हंसी गूंजी, आंगन में, बच्चों के कदम, माँ की लोरी। अब सन्नाटा, बस गूंजता है, खालीपन की एक उदास चोरी। खिड़की से झांकता, बाहर का मेला, पर दिल में कहीं, बस्ती है वीरान। […]
अजनबी अपने ही घर में
अपनी डफली, अपना राग, अपना ही सबका बजता साज। देख के सब अपनों को लगता, अपनी भी परिवार है खुशहाल। पर झूठी निकली सारी बात, किसे कहें और किसे बताएं। ये सब तो है एक नकली ढाल, जहां नहीं कोई अपना पर करते अपनी बात। अपने ही घर में अजनबी से हम, किसे कहें हम […]
अज़नबी अपने ही घर मे
अजनबी अपने ही घर में अजनबी अपने ही घर में हो गए अपने नाजाने किस दुनिया में खो गए…… इंटरनेट ने सभी को एक तरफा कर दिया ,घर घर की कहानी में सब को आइना दिखा दिया….. हर कोई फोन का दिवाना बना दिया रीयल को छोड़ कर, “बनावटी” को सच्चाई मान लिया..… वियोज व […]
अजनबी अपने ही घर में
प्रतियोगिता -बोलती कलम विषय – ” अजनबी अपने ही घर में ” कहने को तो यहां सभी है अपने , साथ-साथ तो हमारे चलते हैं , मगर न जाने क्यों कभी कभार , हमें अपना बनकर ही छलते हैं । दिखावा इतना है अपनेपन का कि , हमें गर्व हो उठता यह अपना है , […]
अजनबी अपने ही घर में
अजनबी अपने ही घर में *अजनबी अपने ही घर में* गरीब लड़का याद आता है, उसकी किस्मत में ये शब्द बचपन से लिख जाता है। उसके पैदा होते ही बहुत सी आशाएं लाद दी जाती हैं, कभी डाक्टर तो कभी इंजीनियर बना दिया जाता है। समाज की सोच कैसी है ये सोच के मुझे दुख […]
अजनबी अपने ही घर में
टॉपिक:- “अजनबी अपने ही घर में ” मैं अपने ही घर में अजनबी हूँ, जहां प्यार और स्नेह होना चाहिए था। अनजान चेहरों के बीच, मैं खुद को खोया हुआ पाती हूँ। दरवाजे खुले हैं, पर दिल बंद हैं, संवादहीनता की दीवारें हैं। प्यार की जगह, अब दूरियां हैं, और मैं अजनबी हूँ, अपने ही […]
अजनबी अपने घर में
“”अजनबी अपने घर में “” ……………………………. जब जीवन साथी न दे तुम्हारा, साथ न पकड़े तुम्हारा हाथ, रुसवा कर दे तुमको रिश्तेदारों, के, बीच न हो तुम्हारा सम्मान, तब महसूस होता है तुम अजनबी, हो अपने घर में…… जब बच्चे बड़े हो जाय तुमको संग,अपने न रखना चाहें अपनी दुनिया, सजाकर तुमको अकेला कर जाएं, […]
अजनबी अपने ही घर में
विषय- अजनबी अपने ही घर में है पास मेरे कहने को बहुत कुछ, पर आजकल मैं खामोश सी हो गई हूँ, गुम हूँ न जाने कौन सी दुनिया में, मैं अजनबी अपने ही घर में हो गई हूँ। कहने सुनने को कोई नहीं है अपनों में, इसलिए मैं कलम की अपनी सी हो गई हूँ, […]
अजनबी अपने ही घर में
*अज़नबी अपने ही घर में*~ कभी किसी मुकाम पर हम अज़नबी अपने ही घर मे बन जाते है , कुछ रिश्ते बहुत पास होकर भी दूर होने का अहसास कराते है , चलती रहती है ज़िंदगी हमारी इनके एहसान तले , चाह कर भी हम ऐसे बंधनो से कभी नही छूट पाते है । बचपन […]
