दरख़्त जैसे रिश्ते थे, हर शाख़ में बहार, अब हर सदा में तन्हाई है, दिल में है गुबार। एक दरख़्त की छाँव में, मिलते थे सब सबा, अब हर कोई जुदा है, बस हैसियत का ख़ुमार। जड़ें थीं जो मोहब्बत की, अब सूखती सी लगें, रिश्तों की नमी ग़ायब, दिल भी है ख़स्ता-ए-कार। माँ-बाप की […]
Category: Hindi kavita
आज़ाद परिंदे
आज़ाद परिंदे नया युग है ,अब नया आग़ाज़ होगा , बेशक! फिर नई ही कोई बात होगी । पंख लगे जो सपनों को एकबार तो , यक़ीनन मंजिल से मुलाक़ात होगी । न कोई बांध सकता है,न ही क़ैद कर पाएगा। परिंदा है वो, उड़े बिना कैसे रह पाएगा । एक उड़ान चाहिए खुले आकाश […]
“कौन हुँ मैं”
शीर्षक – “कौन हूँ मैं” पांच तत्वों से मिलकर बना माटी का देह ये, इक दिन इसी मे मिल जाना है, पूछते हो “कौन हूँ मैं”….? क्या इसका सटीक उत्तर आज तक कोई दे सका है? सब मोह-माया की इस नगरी मे लीन ऐसे हो गए है, इस मानव देह को नश्वर समझ के भी […]
दुनिया बदल डाली
समन्दर की गहराई हूं । तड़पता हुआ नगमा हूं। वक्त की पुकार हूं। खोई हुई दास्ता हूं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 मिलो दूर पत्थरो के शहर में, मिलती है तन्हाई की लहर में, सो गया है आगोश में पल, क्यों की अब पल पल कहर में। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पलके जुकी है आज पनाह में, ख्वाहिश है आज बेपनाह में, […]
रोटी कपड़ा और मकान
विषय – रोटी कपड़ा और मकान मिलते धक्के और ताने समाज के सब सहना पड़ता हैं, गिर जाओ अगर तो फिर उठ खुद से चलना पड़ता हैं । हसेंगे सब जब तरसोगे तुम एक रोटी के लिए शिवोम, रोटी कपड़ा मकान के लिए खुद को घिसना पड़ता हैं। गुज़ारिश हैं खुदा से मेरी मुझको इतना […]



