संघर्ष से संकल्प तक

प्रतियोगिता : शब्दों की अमृतवाणी कविता : संघर्ष से संकल्प तक रचयिता : सुनील मौर्या चरण : फाइनल आधारित. : चलचित्र परिचय : ज़िंदगी की असली ताक़त दौलत या शरीर में नहीं, बल्कि उस जज़्बे में है जो हर हालात को जीत में बदल देता है। यही जज़्बा है — संघर्ष से संकल्प तक.. संघर्ष […]

” मेरा गांव मेरा छांव “

प्रतियोगिता- (शब्दों की अमृतवाणी ) विषय – ” मेरा गांव मेरा छांव ” सुन ओ मेरे चंदा मामा आज पहना दो हमें बचपन का जामा हम लौटना चाहते हैं उन्हीं हुड़दंग गलियों में जहां कृत्रिम शोर नहीं प्रकृति का बसता है समां ।। ओह ! छत पर भाई-बहनों के संग चंदा तुझे निहारना फिर अचानक […]

“मेहनत तुम दो फल हम देंगे “

प्रतियोगिता शब्दों की अमृतवाणी विषय – मेहनत तुम दो फल हम देंगे ( ज़िंदगी कह रही ) मेहनत तुम दो फल हम देंगे आगे पीछे की चिंता तुम नहीं हम करेंगे ज़िंदगी कह रही है इंसान तू कर्म तो कर हम और इससे ज़्यादा तुमसे क्या कहेंगे !! अब नहीं सीखा तो कब सीखोगे ? […]

मेहनत और किस्मत

प्रतियोगिता – शब्दों की अमृतवाणी विषय – मेहनत और किस्मत जिम्मेदारी सर पर थी, पर शिकन माथे पे नहीं थी, मजदूर था मजबूरी में, ज़माने की गालियां सही थी, आँखों में उसकी चिंता के, आँसू झलक रहे थे, पेट में दौड़ते चूहें, एक निवाले को तरस रहे थे, सूरज तेज़ बरसा के,उसके धैर्य को परख […]

संघर्ष और जिम्मेदारियों से लिपटी जिंदगी

प्रतियोगिता ‘ शब्दों की अमृतवाणी ‘ विषय – “संघर्ष और जिम्मेदारियों से लिपटी जिंदगी” रात की थकान संग,सुबह नई जंग होती है, हर साँस में एक अधूरी उमंग होती है, कंधों पर बोझ,सपनों का कहीं गुम हो जाना, मुस्कुराकर दर्द छिपाना ही रोज़ का तराना। हर क़दम पे ठोकर,हर मोड़ पर इम्तिहान, फ़िर भी आशाओं […]

मेरा बाप मजदूर है

*मेरा बाप मजदूर है* ( इस कविता को इस तरह पढ़े कि मानो कोई चलचित्र आंखों के सामने हो !!) कभी खींचता रिक्शा, तो कभी ठेला, कभी जाता बाज़ार, कभी कोई मेला। जेब में पैसे नहीं, फिर भी जीता है, खून जलाकर पसीना रोज़ पीता है। कभी बना वो कुली, कभी दरबारी, पर हिम्मत देखो […]

जीवन का संघर्ष और मज़दूर

प्रतियोगिया ~ *शब्दो की अमृतवाणी* *जीवन का संघर्ष और मज़दूर*~ उम्र को मात देता सूरज का साथ देता चल पड़ा वो रोजी को , बच्चों का भूख से बिलखता चेहरा लिए आंखों में निकल पड़ा वो रोटी को । वजन ढोना मजबूरी है , मंजिल से अभी बहुत दूरी है , क़दम रोज़ उसका साथ […]

मजबूरी

प्रतियोगिता “शब्दों की अमृतवाणी” सीरीज 1, फाइनल राउंड टॉपिक ‘मजबूरी’ __________________________ तपती धूप में, बूढ़ी काया, झुकी पीठ पर जीवन की छाया। जिस उम्र में खुद का बोझ संभाला ना जाए, उसी उम्र में वो औरों का बोझ उठाए। जिन बच्चों का पालन-पोषण वो करता जाय, मुस्कान आती चेहरे पे उसके, अगर वो बच्चे भी […]

Garibi se bada imaan

प्रतियोगिता “शब्दों की अमृतवाणी ” विषय- “गरीबी से बड़ा ईमान” “फाइनल राउंड ” …………………….. ताकत से नहीं मनोबल से टूटा हूँ, तन से आज भी मजबूत हूँ, मैं परवरिश के धागों में बँधा हूँ, गरीब हूँ चोर नहीं मैं मेहनत, से जीना चाहता हूं ….!!! परवरदीगार तूने मुझे जीवन दिया, मुझे अधूरा बनाकर पूर्ण किया, […]

हर चुनौती तुम्हें विजेता बनती है जिंदगी की

*सेकंड राउंड* विषय:- *हर चुनौती तुम्हें विजेता बनती है जिंदगी की* जीवन हर मोड़ पर इम्तिहान रखता है, और संघर्ष ही इंसान की पहचान रखता है। बूढ़ा शरीर, काँपते कदम, फिर भी मुस्कुराता, समय की मार झेलकर भी हिम्मत दिखाता। दो हाथ नहीं, पर हौसले परवान हैं, पैरों से चलता ट्रैक्टर, यही उसकी जान है। […]