मैं समय से शिकवा नहीं करता, वह तो चक्र है, घूमता अनवरत, पल-पल बदलता रंगों का मेला, फिर भी मैं उससे मन जुदा नहीं करता। सूरज उगता, तारे छिप जाते, पंछी चहकते, सपने जागते, हर क्षण में बस जीवन की धुन, मैं उस धुन से राग नहीं छोड़ता। वक्त की लहरें किनारे छू जाएँ, कभी […]
मैं समय से शिकवा नहीं करता…
मैं समय से शिकवा नहीं करता —प्रशांत कुमार शाह जो किस्मत में है, वो कहाँ जाएगा, वक़्त आने पर ख़ुद चलकर आएगा। अब किसी बात का मलाल नहीं, इसलिए मेरा कभी बुरा हाल नहीं। मेहनत करता हूँ, फल की चिंता नहीं, जो ना मिले, उस पर कोई हिंसा नहीं। मैं समय से शिकवा नहीं करता, […]
में समय से शिकवा नहीं करती
प्रतियोगिता: बोलती कलम (जहां हर शब्द बोलता है) टॉपिक: मैं समय से शिकवा नहीं करती मैं समय से शिकवा नहीं करती, बस दिल के टुकड़े संभालती हूँ। जिन राहों पे मुझे दर्द ही मिलता है, उन रहो पर भी मुस्कुराती हूँ। मेरे हर आंसू के पीछे एक दास्तान है, चुप रहकर वो दास्तान में खुद […]
मैं समय से शिकवा नहीं करता
लेकर जज्बा शिवोम नित आगे बढ़ता चुनौतियों का सामना भी डट के करता दिखाता हैं हिम्मत संघर्ष जारी रखता हा मैं समय से शिकवा नहीं करता…. अंधकार में भी रास्ता हूं मैं ढूंढ लेता दृढ़ संकल्प के साथ आगे हूं बढ़ता परिस्थिति जैसी भी हो मेरे सामने मैं कभी समय से शिकवा नहीं करता… जिंदगी […]
अजनबी अपने ही घर में
क्यों हूं अजनबी अपने ही घर में, क्यों किसी से मिलता नहीं l क्यों एकांत वास अच्छा लगता, क्यों किसी के पास बैठता नहीं l दिल में ऐसा क्या बैठा है, जो भुलाए से भूलता नहीं l क्यों दिल ने चोट खाई, मन कहीं लगता नहीं l छोड़ा उसने एक पल में, प्यार तुम्हारा समझा […]
अजनबी अपने ही घर में
विषय- “अजनबी अपने ही घर में ” चेहरे पे नक़ाब की चादर लिपटी हैं, जब आईने में नजर खुद से मिलती हैं, बिन कहे पलकों से बारिश गिरती हैं, कोई देख न ले…इसलिए अधरों पे मुस्कान होती हैं। यूँ तो चारों ओर से घिरी हुई हूँ, अपनो की इस भिड़ में फिर भी अकेली हूँ… […]
अजनबी अपने ही घर में
अजनबी अपने ही घर में, खोया सा मन, राहों में भटके। दीवारें चुप, साये ठहरे, यादें पुरानी, अब सपनों में थके। कभी हंसी गूंजी, आंगन में, बच्चों के कदम, माँ की लोरी। अब सन्नाटा, बस गूंजता है, खालीपन की एक उदास चोरी। खिड़की से झांकता, बाहर का मेला, पर दिल में कहीं, बस्ती है वीरान। […]
अजनबी अपने ही घर में
अपनी डफली, अपना राग, अपना ही सबका बजता साज। देख के सब अपनों को लगता, अपनी भी परिवार है खुशहाल। पर झूठी निकली सारी बात, किसे कहें और किसे बताएं। ये सब तो है एक नकली ढाल, जहां नहीं कोई अपना पर करते अपनी बात। अपने ही घर में अजनबी से हम, किसे कहें हम […]
अज़नबी अपने ही घर मे
अजनबी अपने ही घर में अजनबी अपने ही घर में हो गए अपने नाजाने किस दुनिया में खो गए…… इंटरनेट ने सभी को एक तरफा कर दिया ,घर घर की कहानी में सब को आइना दिखा दिया….. हर कोई फोन का दिवाना बना दिया रीयल को छोड़ कर, “बनावटी” को सच्चाई मान लिया..… वियोज व […]
अजनबी अपने ही घर में
प्रतियोगिता -बोलती कलम विषय – ” अजनबी अपने ही घर में ” कहने को तो यहां सभी है अपने , साथ-साथ तो हमारे चलते हैं , मगर न जाने क्यों कभी कभार , हमें अपना बनकर ही छलते हैं । दिखावा इतना है अपनेपन का कि , हमें गर्व हो उठता यह अपना है , […]
