अजनबी अपने ही घर में

अजनबी अपने ही घर में *अजनबी अपने ही घर में* गरीब लड़का याद आता है, उसकी किस्मत में ये शब्द बचपन से लिख जाता है। उसके पैदा होते ही बहुत सी आशाएं लाद दी जाती हैं, कभी डाक्टर तो कभी इंजीनियर बना दिया जाता है। समाज की सोच कैसी है ये सोच के मुझे दुख […]

अजनबी अपने ही घर में

टॉपिक:- “अजनबी अपने ही घर में ” मैं अपने ही घर में अजनबी हूँ, जहां प्यार और स्नेह होना चाहिए था। अनजान चेहरों के बीच, मैं खुद को खोया हुआ पाती हूँ। दरवाजे खुले हैं, पर दिल बंद हैं, संवादहीनता की दीवारें हैं। प्यार की जगह, अब दूरियां हैं, और मैं अजनबी हूँ, अपने ही […]

अजनबी अपने घर में

“”अजनबी अपने घर में “” ……………………………. जब जीवन साथी न दे तुम्हारा, साथ न पकड़े तुम्हारा हाथ, रुसवा कर दे तुमको रिश्तेदारों, के, बीच न हो तुम्हारा सम्मान, तब महसूस होता है तुम अजनबी, हो अपने घर में…… जब बच्चे बड़े हो जाय तुमको संग,अपने न रखना चाहें अपनी दुनिया, सजाकर तुमको अकेला कर जाएं, […]

अजनबी अपने ही घर में

विषय- अजनबी अपने ही घर में है पास मेरे कहने को बहुत कुछ, पर आजकल मैं खामोश सी हो गई हूँ, गुम हूँ न जाने कौन सी दुनिया में, मैं अजनबी अपने ही घर में हो गई हूँ। कहने सुनने को कोई नहीं है अपनों में, इसलिए मैं कलम की अपनी सी हो गई हूँ, […]

अजनबी अपने ही घर में

*अज़नबी अपने ही घर में*~ कभी किसी मुकाम पर हम अज़नबी अपने ही घर मे बन जाते है , कुछ रिश्ते बहुत पास होकर भी दूर होने का अहसास कराते है , चलती रहती है ज़िंदगी हमारी इनके एहसान तले , चाह कर भी हम ऐसे बंधनो से कभी नही छूट पाते है । बचपन […]

अजनबी अपने ही घर में

विषय – अजनबी अपने ही घर में जाने कहाँ गए वो दिन , जब मकान नही घर होते थे, दिलों में प्रेम था , दिन एक दूसरे के दिल में बसर होते थे, परिवार के सहारे , लोग अपने हर मुकाम तक आ जाते थे, पाकर सहारा एकदूजे का ,हर मंजिल को पा जाते थे, […]

अजबनी अपने ही घर में..

प्रतियोगिता : बोलती क़लम विषय : अजनबी अपने ही घर में हम अजनबी अपने ही घर में हो गये, बा-ख्याल इश्क़ में यूँ बर्बाद हो गये… .. कमरे की दीवारों-दर चीखते रह गये, ख़्वाब ख़ाक हुये, हम देखते रह गये… .. उनसे क्या कहे, सोचते ही रह गये, कुछ घाव फिर यूँ, नासूर ही रह […]

अजनबी अपने ही घर में

अजनबी अपने ही घर में बने बैठे हैं सब फुर्सत नहीं कि अपनों का हाल तक जाने जिसने पाला पोसा अपनी जिंदगी वार दी उसी को अपने घर में अजनबी हैं वो माने साथ बैठ दो पल बिताने की फुर्सत नहीं पैसे को ही अब सबसे बड़ा रिश्ता हैं माने अजनबी हुए जब खुद को […]

अजनबी अपने ही घर मे

अजनबी अपने ही घर मे Ravikant Dushe अजनबी अपने ही घर मे हो गए सारे इल्ज़ाम मेरे ही सर हो गए न रहा कुछ भी अब मेरा यहाँ जबसे वो दिल के मालिक हो गए ये दीवारें जो कभी लगती थी अपनी सब इशारे अब पराये हो गए ये इश्क कर देता हैं बेगाना सबसे […]

अजनबी अपने ही घर में

बैठे कहीं कोने में , सिमटकर अपने ही मन में, न बोला गया कुछ भी, है कैसी शांति जीवन में, चल रहा है न जाने क्या नहीं अन्दर, मगर फिर क्यों अजनबी हैं अपने ही घर में ….? सोचना है पड़ रहा कुछ कहने से पहले , वो मां – बाप हैं फिर भी बैठे […]