“कौन हुँ मैं”

शीर्षक – “कौन हूँ मैं” पांच तत्वों से मिलकर बना माटी का देह ये, इक दिन इसी मे मिल जाना है, पूछते हो “कौन हूँ मैं”….? क्या इसका सटीक उत्तर आज तक कोई दे सका है? सब मोह-माया की इस नगरी मे लीन ऐसे हो गए है, इस मानव देह को नश्वर समझ के भी […]

दुनिया बदल डाली

समन्दर की गहराई हूं । तड़पता हुआ नगमा हूं। वक्त की पुकार हूं। खोई हुई दास्ता हूं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 मिलो दूर पत्थरो के शहर में, मिलती  है तन्हाई की लहर में, सो गया है आगोश में पल, क्यों की अब पल पल कहर में। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पलके जुकी है आज पनाह में, ख्वाहिश है आज बेपनाह में, […]

रोटी कपड़ा और मकान

विषय – रोटी कपड़ा और मकान मिलते धक्के और ताने समाज के सब सहना पड़ता हैं, गिर जाओ अगर तो फिर उठ खुद से चलना पड़ता हैं । हसेंगे सब जब तरसोगे तुम एक रोटी के लिए शिवोम, रोटी कपड़ा मकान के लिए खुद को घिसना पड़ता हैं। गुज़ारिश हैं खुदा से मेरी मुझको इतना […]

हवस

तुझे देखना, तुझे गले लगाना, ये मेरी हवस नहीं है, जो लोग समझते हैं। तुझे छूकर जो एहसास-ए-सुकून मिले, वो किसी बाज़ार की सौगात नहीं। तेरी नज़ाकत को इश्क़ समझा है, कोई राहगीर की बात नहीं। तेरी महक में जो रूह बहक जाए, वो मोहब्बत की परछाईं होती है। जिसे हवस कहे ये दुनिया सारी, […]

झंडा

ना कसूर हमारा है, ना दोष तुम्हारा है,फिर क्यों दोनों के हाथों में, ये अलग-अलग झंडा लहराया है…हम तो बस मोहब्बत के सौदागर थे,किसी मज़हब की दीवार ने कब हमें रोक पाया है? पर सियासत ने नफरत का सौदा किया,मस्जिद-ओ-मंदिर के बीच फासला बढ़ा दिया…वो ताश के पत्तों से खेलते रहे हमारे जज़्बातों से,और हम […]