शीर्षक – “कौन हूँ मैं” पांच तत्वों से मिलकर बना माटी का देह ये, इक दिन इसी मे मिल जाना है, पूछते हो “कौन हूँ मैं”….? क्या इसका सटीक उत्तर आज तक कोई दे सका है? सब मोह-माया की इस नगरी मे लीन ऐसे हो गए है, इस मानव देह को नश्वर समझ के भी […]
दुनिया बदल डाली
समन्दर की गहराई हूं । तड़पता हुआ नगमा हूं। वक्त की पुकार हूं। खोई हुई दास्ता हूं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 मिलो दूर पत्थरो के शहर में, मिलती है तन्हाई की लहर में, सो गया है आगोश में पल, क्यों की अब पल पल कहर में। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 पलके जुकी है आज पनाह में, ख्वाहिश है आज बेपनाह में, […]
रोटी कपड़ा और मकान
विषय – रोटी कपड़ा और मकान मिलते धक्के और ताने समाज के सब सहना पड़ता हैं, गिर जाओ अगर तो फिर उठ खुद से चलना पड़ता हैं । हसेंगे सब जब तरसोगे तुम एक रोटी के लिए शिवोम, रोटी कपड़ा मकान के लिए खुद को घिसना पड़ता हैं। गुज़ारिश हैं खुदा से मेरी मुझको इतना […]


